CG Snake Bite Tragedy : बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से सर्पदंश की एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के डंभाटोली गांव में जहरीले सांप के काटने से एक पिता और उसकी चार वर्षीय मासूम बेटी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दोनों रात में घर के भीतर सो रहे थे, तभी सांप ने उन्हें डस लिया। घटना के बाद परिजन तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में लगे रहे, जिससे इलाज में देरी हो गई और दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास और समय पर चिकित्सा उपचार के महत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात में सोते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, डंभाटोली गांव में रहने वाला परिवार रात के समय अपने घर में सो रहा था। इसी दौरान एक जहरीला सांप घर में घुस आया और पिता तथा उसकी चार वर्षीय बेटी को डस लिया। कुछ देर बाद दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजनों को सर्पदंश की आशंका हुई।
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परिवार के सदस्यों ने पहले स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक का सहारा लिया। इस दौरान काफी समय बीत गया और पीड़ितों की हालत लगातार गंभीर होती चली गई।
इलाज में देरी बनी जानलेवा
बताया जा रहा है कि जब तक परिजन दोनों को अस्पताल ले जाने का निर्णय लेते, तब तक काफी देर हो चुकी थी। स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही पिता और बेटी ने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है और समय पर एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) तथा चिकित्सकीय उपचार मिलने से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
ग्रामीण इलाकों में आज भी कई लोग सर्पदंश के बाद अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक या पारंपरिक तरीकों पर भरोसा कर लेते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
गांव में पसरा मातम
पिता और मासूम बेटी की एक साथ मौत की खबर से पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते दोनों को अस्पताल पहुंचाया जाता, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने और सर्पदंश की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की अपील की है।
स्वास्थ्य विभाग ने दी जरूरी सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के काटने पर घबराने के बजाय मरीज को शांत रखें और बिना समय गंवाए निकटतम अस्पताल ले जाएं। झाड़-फूंक, घरेलू नुस्खों या किसी अप्रमाणित उपचार पर निर्भर रहने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे इलाज में देरी होती है और जान का खतरा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक दवाएं और एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध रहते हैं। समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।
बलरामपुर की यह दुखद घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में अंधविश्वास नहीं, बल्कि तत्काल चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

