छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नियमित और अग्रिम जमानत आवेदनों के प्रारूप में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब जमानत आवेदन दाखिल करने वाले आवेदकों को अपनी पूरी कानूनी और आपराधिक जानकारी टेबुलर फॉर्म यानी सारणीबद्ध प्रारूप में देनी होगी। यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब केवल केस नंबर और धाराएं लिखना पर्याप्त नहीं होगा। नए प्रारूप में आवेदकों को एफआईआर नंबर, दर्ज होने की तारीख, संबंधित थाना और जिला, साथ ही किन धाराओं में मामला दर्ज है, इसकी विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसके अलावा संबंधित धाराओं में अधिकतम सजा का प्रावधान भी बताना अनिवार्य किया गया है।
नियमित जमानत आवेदन में अब यह जानकारी भी देनी होगी कि आरोपी की गिरफ्तारी कब हुई और वह अब तक कितने समय से जेल में बंद है। साथ ही यह खुलासा करना होगा कि आरोपी के खिलाफ कभी गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है या उसे घोषित अपराधी करार दिया गया है।
नए नियमों के तहत केस की वर्तमान स्थिति का उल्लेख भी जरूरी होगा। इसमें जांच पूरी हुई या नहीं, चार्जशीट पेश हुई या नहीं, ट्रायल किस चरण में है, कुल कितने गवाह हैं और अब तक कितनों के बयान दर्ज हुए हैं, जैसी जानकारियां शामिल करनी होंगी।
इसके अलावा आवेदक को अपना पूरा आपराधिक रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होगा। यदि उसके खिलाफ पहले से अन्य मामले दर्ज हैं तो उन मामलों के एफआईआर नंबर, धाराएं और वर्तमान स्थिति का विवरण देना होगा। यह भी बताना होगा कि संबंधित मामलों में आरोपी बरी हुआ, दोषी ठहराया गया या मामला अभी लंबित है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित मामले में पहले दाखिल किए गए जमानत आवेदनों और उनके परिणामों की जानकारी देना भी अनिवार्य होगा। अधिसूचना की प्रतियां राज्य के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, फैमिली कोर्ट के न्यायाधीशों, एडवोकेट जनरल और बार एसोसिएशन के अध्यक्षों को भेज दी गई हैं।
माना जा रहा है कि इस नई व्यवस्था से अदालतों में सुनवाई प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, कोर्ट का समय बचेगा और गलत जानकारी देकर जमानत लेने की कोशिशों पर रोक लगेगी।

