Nitish Kumar Cabinet Expansion , पटना — बिहार की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली नई कैबिनेट में 32 मंत्रियों ने शपथ ली है। सबसे ज्यादा चर्चा OBC और EBC नेताओं की मजबूत मौजूदगी को लेकर हो रही है। सत्ता के गलियारों में इसे सीधे तौर पर आगामी चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
जातीय संतुलन से चुनावी संदेश देने की कोशिश
नई कैबिनेट की तस्वीर साफ संकेत देती है कि सरकार सामाजिक समीकरणों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहती है। मंत्रिमंडल में पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और सवर्ण वर्ग के नेताओं को जगह देकर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश हुई है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव का सीधा रोडमैप भी है।
सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट में कई ऐसे चेहरे शामिल किए गए हैं जिनकी अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ मानी जाती है। निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। हालांकि, अंतिम विभागीय बंटवारे पर सबकी नजर टिकी हुई है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पटना का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म दिखा। सुरक्षा कड़ी थी। बाहर समर्थकों की भीड़ नारे लगा रही थी। अंदर नेताओं के बीच लगातार चर्चा चलती रही। एक वरिष्ठ नेता ने मंच से उतरते वक्त मुस्कुराकर कहा, “अब असली परीक्षा मैदान में होगी।”
सत्ता और सामाजिक समीकरण का नया गणित
बिहार की राजनीति लंबे समय से जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इस बार भी वही तस्वीर दिखाई दी। OBC-EBC वर्ग को मजबूत प्रतिनिधित्व देकर सरकार ने बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण वोट बैंक को साधने के लिए यह रणनीति अहम भूमिका निभा सकती है। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं को मौका मिला। इससे पार्टी संगठन के भीतर भी नई ऊर्जा का संकेत माना जा रहा है। समारोह के दौरान कई युवा कार्यकर्ता मोबाइल कैमरे से वीडियो बनाते नजर आए। बाहर खड़े लोगों के बीच सिर्फ एक चर्चा थी — “किसे कितना बड़ा मंत्रालय मिलेगा?”

