बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी मानी जाने वाली अरपा, महानदी और शिवनाथ सहित 11 प्रमुख नदियों के संरक्षण और संवर्धन के मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल प्रशासनिक अधिकारियों से नदियों की सेहत नहीं सुधरेगी, इसमें विषय विशेषज्ञों की अनिवार्य आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु: हाई कोर्ट में क्या हुआ?
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सरकार का पक्ष: राज्य शासन ने चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच को बताया कि मुख्य सचिव (CS) विकासशील खुद इन 11 नदियों के संरक्षण कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। शासन ने कमेटी में विभिन्न विभागों के सचिवों को शामिल करने की जानकारी दी।
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कोर्ट की आपत्ति: जस्टिस की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस कमेटी में केवल ब्यूरोक्रेट्स (सचिवों) को रखना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या ये अधिकारी तकनीकी रूप से नदी पुनरुद्धार की बारीकियों को समझते हैं?
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निर्देश: हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अपनी कमेटी की संरचना पर पुनर्विचार करने को कहा है और निर्देश दिया है कि इसमें पर्यावरणविदों, जल विज्ञानियों (Hydrologists) और नदी विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
इन 11 नदियों की बदलेगी सूरत
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की निम्नलिखित प्रमुख नदियों के संरक्षण के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है:
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महानदी
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शिवनाथ
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अरपा
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हसदेव
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इंद्रावती
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खारून (सहित कुल 11 नदियां)
प्रस्तावित कार्य: इन नदियों के किनारों से अतिक्रमण हटाना, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाना, वृक्षारोपण करना और जल स्तर को बढ़ाने के लिए चेकडैम का निर्माण करना शामिल है।

