Gyanesh Kumar Protest : नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने फिलहाल प्रदर्शन को कुछ समय के लिए रोकने की अपील की है। दिवाली के मद्देनजर उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने परिवार के साथ वक्त बिताने और त्योहार मनाने का आग्रह किया। इस दौरान जेल में बंद अपने सहयोगियों सौरव दास और आशुतोष रांका को याद करते हुए दीपके भावुक हो गए। उन्होंने आंदोलन में दोनों की भूमिका और उनके संघर्ष को महत्वपूर्ण बताया।
दिवाली तक आंदोलन रोकने की अपील
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर लाइव संदेश के जरिए आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में लगातार सक्रिय रहने वाले लोगों को कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी आंदोलन का असर केवल प्रदर्शनकारियों पर नहीं, बल्कि उनके परिवारों पर भी पड़ता है।
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दीपके ने कार्यकर्ताओं से दिवाली तक परिवार के साथ समय बिताने की अपील की। इसे आंदोलन से स्थायी रूप से पीछे हटने के बजाय त्योहार के दौरान अस्थायी विराम के तौर पर देखा जा रहा है।
सौरव दास और आशुतोष रांका को याद कर हुए भावुक
अपने संदेश में दीपके ने जेल में बंद सौरव दास और आशुतोष रांका का जिक्र किया। उन्होंने दोनों को आंदोलन के मजबूत साथी बताते हुए उनके साहस और प्रतिबद्धता की सराहना की।
सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उनकी न्यायिक हिरासत भी बढ़ाई गई। दोनों की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने उनके समर्थन में प्रदर्शन किए और उनकी रिहाई की मांग उठाई।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर जारी है विवाद
कॉकरोच जनता पार्टी और उससे जुड़े कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप हैं।
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया का बचाव किया गया है।
गांधीवादी तरीके से आंदोलन जारी रखने का संदेश
दीपके ने अपने सहयोगियों के संघर्ष को सत्याग्रह की भावना से जोड़ते हुए अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने पर जोर दिया। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य समाज में बदलाव लाना और लोगों की आवाज उठाना है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारने का संदेश दिया। उनके भावुक संबोधन से यह भी स्पष्ट हुआ कि जेल में बंद साथियों की स्थिति आंदोलन के नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

