नई दिल्ली।’ भारत में डिजिटल क्रांति के साथ आज 1 अप्रैल 2026 से बहुप्रतीक्षित ‘जनगणना 2027’ के पहले चरण का आगाज हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों और ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) पोर्टल के एफएक्यू (FAQs) ने कई दिलचस्प बदलावों को सामने रखा है। इस बार की जनगणना न केवल पूरी तरह डिजिटल होगी, बल्कि सामाजिक और तकनीकी परिभाषाओं को भी नए सिरे से परिभाषित करेगी।
लिव-इन रिलेशनशिप पर बड़ा फैसला
जनगणना पोर्टल पर स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई कपल ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ में रह रहा है और वे अपने रिश्ते को एक ‘स्थिर संघ’ (Stable Union) मानते हैं, तो उन्हें जनगणना के दौरान ‘शादीशुदा’ (Married) ही दर्ज किया जाएगा। इसके लिए किसी दस्तावेजी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होगी;
गैजेट्स की परिभाषा बदली: मोबाइल में FM मतलब रेडियो
बदलते दौर के साथ जनगणना के सवालों में तकनीक को भी शामिल किया गया है:
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रेडियो: यदि आपके पास अलग से रेडियो सेट नहीं है लेकिन मोबाइल में FM रेडियो की सुविधा है, तो आपको ‘रेडियो’ श्रेणी में गिना जाएगा।
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स्मार्टफोन vs टीवी: मोबाइल या टैबलेट पर यूट्यूब और ओटीटी (OTT) देखना ‘टीवी देखना’ नहीं माना जाएगा। टीवी श्रेणी में केवल वास्तविक टेलीविजन सेट रखने वालों को ही शामिल किया जाएगा।
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इंटरनेट और कंप्यूटर: घर में इंटरनेट एक्सेस और लैपटॉप/कंप्यूटर की उपलब्धता पर भी अलग से डेटा जुटाया जाएगा।
दो चरणों में होगी पूरी प्रक्रिया
जनगणना 2027 को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है:
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पहला चरण (1 अप्रैल 2026 – 30 सितंबर 2026): इसे ‘हाउस लिस्टिंग’ (Houselisting) कहा जाता है। इसमें मकानों की गिनती, घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं (बिजली, पानी, शौचालय) और संपत्ति (वाहन, गैजेट्स) से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे।
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दूसरा चरण (फरवरी 2027): इसे ‘जनसंख्या गणना’ (Population Enumeration) कहा जाएगा। इसमें व्यक्तियों की निजी जानकारी जैसे नाम, उम्र, धर्म और जाति (Caste) पूछी जाएगी।
जाति जनगणना का ऐतिहासिक कदम: आजादी के बाद पहली बार 2027 में जातिगत डेटा जुटाया जाएगा। इससे पहले आखिरी बार 1931 में जाति आधारित जनगणना हुई थी।

