वन संपदा और वन्यजीवों पर संकट
आग की शुरुआत सीतानदी रेंज के घठुला क्षेत्र से हुई। सूखी पत्तियों और लकड़ी के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। बोरई और अंगिरा ऋषि पहाड़ी का इलाका औषधीय पौधों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। आग की वजह से छोटे वन्यजीवों और रेंगने वाले जीवों को भारी नुकसान होने की आशंका है। वन विभाग ने फायर वॉचर्स की टीम को मौके पर तैनात किया है, जो ‘फायर लाइन’ काटकर आग को फैलने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया है। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन मानवीय चूक या महुआ बीनने वालों द्वारा लगाई गई आग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
“आग काफी ऊंचे पहाड़ी इलाकों तक फैल गई है। हमारी टीमें मौके पर मौजूद हैं और आग को रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ने से रोक लिया गया है। पहाड़ी ढलान और पथरीला रास्ता होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल है, इसलिए पारंपरिक तरीकों से आग बुझाई जा रही है।” — वन परिक्षेत्र अधिकारी, सीतानदी रेंज

