Vijay Sharma’ रायपुर। छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की खबर सामने आई है। भारतीय सेना में बस्तर रेजिमेंट की स्थापना की दिशा में प्रक्रिया शुरू हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस संबंध में प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है। लंबे समय से उठ रही इस मांग पर केंद्र सरकार की पहल को बस्तर के युवाओं और प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह रेजिमेंट अस्तित्व में आती है, तो इससे आदिवासी युवाओं को सेना में अधिक अवसर मिलने के साथ-साथ क्षेत्र की वीर परंपरा को भी नई पहचान मिलेगी।
विजय शर्मा ने उठाई थी बस्तर रेजिमेंट की मांग
प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने केंद्र सरकार से भारतीय सेना में बस्तर रेजिमेंट के गठन की मांग की थी। उन्होंने अपने प्रस्ताव में कहा था कि बस्तर संभाग के आदिवासी युवा वर्षों से देश सेवा के प्रति समर्पित रहे हैं और उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में असाधारण साहस और वीरता का परिचय दिया है।
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उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण वातावरण में कार्य करने का अनुभव रखने वाले बस्तर के युवाओं की सैन्य क्षमता देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर सकती है।
रक्षा मंत्री ने पत्र भेजकर दी जानकारी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गृहमंत्री विजय शर्मा को भेजे पत्र में बस्तर रेजिमेंट की स्थापना से संबंधित प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी है। इस पत्र के बाद प्रदेश में उत्साह का माहौल है और इसे बस्तर क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि रेजिमेंट के गठन, भर्ती प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक पहलुओं को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।
बस्तर के युवाओं को मिलेगा नया मंच
बस्तर संभाग के युवा लंबे समय से सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस सेवाओं में अपनी उत्कृष्ट भूमिका निभाते रहे हैं। क्षेत्र के कई युवाओं ने देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
बस्तर रेजिमेंट बनने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने से स्थानीय युवाओं में सेना में भर्ती होने के प्रति और अधिक उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही क्षेत्र की वीरता और सैन्य परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।
नक्सल विरोधी अभियानों में दिखाई है बहादुरी
बस्तर के आदिवासी जवानों ने वर्षों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के साथ मिलकर अनेक अभियानों में साहस और समर्पण का परिचय दिया है। स्थानीय भूगोल, जंगलों और कठिन परिस्थितियों की समझ के कारण उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
इसी अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए बस्तर रेजिमेंट की मांग लगातार उठाई जाती रही है।

