CG NEWS : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जोन यानी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की जांच में यहां पानी की गुणवत्ता बेहद खराब पाए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 16 रेलवे जोन के 512 रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता की जांच की गई, जिसमें बिलासपुर जोन का प्रदर्शन सबसे खराब बताया गया है।
पानी में मिले ई. कोलाई बैक्टीरिया
जांच के दौरान कुछ नमूनों में ई. कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया पाए जाने की जानकारी सामने आई है। पानी में इस तरह के बैक्टीरिया की मौजूदगी आमतौर पर मल या सीवेज से दूषित होने की ओर संकेत करती है। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले पेयजल में ऐसी स्थिति सामने आना स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।
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512 स्टेशनों की हुई जांच
CAG की जांच देशभर के 16 रेलवे जोन में की गई। इसके तहत कुल 512 रेलवे स्टेशनों से संबंधित पेयजल व्यवस्था का परीक्षण किया गया। जांच का उद्देश्य यात्रियों को उपलब्ध कराए जा रहे पानी की गुणवत्ता और रेलवे की पेयजल व्यवस्था की स्थिति का आकलन करना था। रिपोर्ट में अलग-अलग रेलवे जोन की व्यवस्थाओं में अंतर सामने आया।
यात्रियों की सेहत पर खतरा
रेलवे स्टेशन पर रोजाना हजारों यात्री पानी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यदि पेयजल दूषित है तो यात्रियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है। दूषित पानी के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले यात्रियों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है।
मल-सीवेज से दूषित होने का संकेत
ई. कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी पानी के किसी स्तर पर मल या सीवेज के संपर्क में आने का संकेत मानी जाती है। ऐसे में रेलवे स्टेशनों पर पानी के स्रोत, पाइपलाइन, टंकियों और सप्लाई सिस्टम की स्वच्छता की जांच बेहद जरूरी हो जाती है। साथ ही पानी की नियमित जांच और क्लोरीनेशन जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
रेलवे की जल व्यवस्था पर उठे सवाल
CAG की रिपोर्ट के बाद बिलासपुर जोन में रेलवे की पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना रेलवे की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता खराब पाए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

