कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के दीपका स्थित यूनियन बैंक में सेंधमारी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने करीब दो महीने की जांच के बाद वारदात में शामिल दो आरोपियों को हरियाणा के रोहतक से गिरफ्तार किया है। दोनों से पूछताछ कर पुलिस उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और संभावित गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपियों का कनेक्शन अन्य राज्यों में हुई बैंक सेंधमारी की घटनाओं से भी हो सकता है। इसी वजह से पुलिस अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों और आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाने में लगी है।
4 जून की रात बैंक में घुसे थे नकाबपोश आरोपी
मामला दीपका थाना क्षेत्र के प्रगति नगर स्थित यूनियन बैंक शाखा का है। जानकारी के अनुसार, 4 जून की रात करीब 2 बजे दोनों आरोपी काले रंग की कार से बैंक पहुंचे थे।
आरोपियों ने चेहरे पर नकाब और हाथों में दस्ताने पहन रखे थे। इसके बाद उन्होंने बैंक में सेंध लगाकर अंदर प्रवेश किया और लॉकर तक पहुंचने का प्रयास किया। हालांकि, वे लॉकर खोलने में कामयाब नहीं हो सके। असफल रहने के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए।
CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से मिली अहम जानकारी
घटना की जानकारी मिलते ही दीपका पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के साथ CCTV फुटेज, तकनीकी जानकारी और अन्य सुरागों को खंगाला।
करीब दो महीने की लगातार जांच के बाद पुलिस को मुखबिर से आरोपियों के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना मिली। इसके बाद पुलिस टीम हरियाणा के रोहतक पहुंची और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
दोनों आरोपी पहले दीपका की निजी कंपनी में कर चुके हैं काम
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जितेंद्र बड़क (38) और प्रवीण कुमार (30) के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि दोनों आरोपी कुछ वर्ष पहले दीपका की एक प्रतिष्ठित निजी कंपनी में काम कर चुके हैं।
इस कारण उन्हें क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और आसपास की गतिविधियों की जानकारी होने की आशंका है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक में सेंधमारी की साजिश सिर्फ दोनों ने रची थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे।
दूसरे राज्यों की बैंक वारदातों से कनेक्शन की जांच
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और पुराने मामलों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही दूसरे राज्यों में हुई बैंक सेंधमारी की घटनाओं से उनके संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या कोई संगठित गिरोह इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहा है।
बाहरी कर्मचारियों के वेरिफिकेशन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद कोरबा जिले में दूसरे राज्यों से आकर उद्योगों और निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि जिले में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों के लोग उद्योगों और निजी कंपनियों में काम कर रहे हैं, लेकिन सभी का पुलिस वेरिफिकेशन अब तक नहीं हो सका है।
कुछ दिन पहले पैरोल पर जेल से बाहर आए हत्या के एक आरोपी को भी पुलिस ने बालको क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। बताया गया था कि वह बालको प्लांट से जुड़ी निजी कंपनी में काम कर रहा था।
ऐसे मामलों के बाद निजी कंपनियों और औद्योगिक संस्थानों में काम करने वाले बाहरी कर्मचारियों के सत्यापन को लेकर पुलिस-प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

