Nari Shakti Vandan Adhiniyam Update , नई दिल्ली — भारतीय राजनीति आज एक नए युग की दहलीज पर खड़ी है। संसद के विशेष सत्र के पहले दिन मोदी सरकार तीन बड़े संशोधन बिल पेश करने जा रही है। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करना और 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून को जमीन पर उतारना है। यह सत्र भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने वाला है, क्योंकि इससे दशकों से जमी सीटों की संख्या में पहली बार इतना बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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सीटों का विस्तार और 33% का फॉर्मूला
विशेष सत्र में पेश होने वाले इन 3 संशोधन बिलों में सबसे महत्वपूर्ण 131वां संविधान संशोधन विधेयक है। सरकार का लक्ष्य 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है। लेकिन इसके लिए परिसीमन (Delimitation) अनिवार्य है। प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा में राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें आरक्षित की जा सकती हैं, जिससे कुल संख्या 850 तक पहुँच जाएगी।
यह विस्तार इसलिए जरूरी है ताकि महिला उम्मीदवारों को सीटें देते समय मौजूदा पुरुष सांसदों की संख्या में भारी कटौती न करनी पड़े। यानी, सीटों की संख्या बढ़ाकर संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है। जनगणना और परिसीमन के बीच फंसे इस कानून को अब तेजी से लागू करने की तैयारी है।
सदन के अंदर की हलचल
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही गलियारों में जबरदस्त गहमागहमी देखी जा रही है। विपक्ष ने परिसीमन के आधार पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन सरकार ने अपने सांसदों के लिए व्हिप (Whip) जारी कर दिया है।
“यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनका हक देने का संकल्प है। 2026 का यह विशेष सत्र भारत के भविष्य की दिशा तय करेगा और 850 सीटों वाली नई संसद अधिक समावेशी होगी।”— संसदीय कार्य मंत्री, भारत सरकार
सीटों की संख्या 850 होने की खबर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच बहस छेड़ दी है। दक्षिण भारत के राज्यों (तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना) को डर है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उत्तर भारत की सीटें बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी, जिससे केंद्र की राजनीति में उनका प्रभाव कम हो जाएगा। हालांकि, केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होने दिया जाएगा। अगले तीन दिनों तक चलने वाला यह सत्र न केवल सीटों का भूगोल बदलेगा, बल्कि महिला आरक्षण के जरिए सदन की तस्वीर भी बदल देगा। अब सबकी नजरें सदन पटल पर रखे जाने वाले उन कानूनी दस्तावेजों पर हैं, जो 2029 के चुनावी दंगल का आधार बनेंगे।

