कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में SECL की मानिकपुर परियोजना से जुड़ी जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भू-विस्थापितों और प्रभावित ग्रामीणों ने प्रस्तावित जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब तक पुराने वादों और मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक नई परियोजना को लेकर जनसुनवाई कराना उचित नहीं है। ग्रामीणों ने प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी और औपचारिकता मात्र बताया है।
पुराने वादे पूरे करने की मांग
ग्रामीणों और भू-विस्थापितों का कहना है कि SECL की परियोजनाओं के कारण पहले भी बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। विस्थापन और जमीन अधिग्रहण के दौरान प्रभावित परिवारों से कई तरह के वादे किए गए थे। लेकिन उनका आरोप है कि लंबे समय बाद भी कई मांगें पूरी नहीं हुई हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि पहले पुराने मामलों का समाधान किया जाए और प्रभावित परिवारों को उनका हक दिया जाए। इसके बाद ही किसी नई परियोजना या विस्तार को लेकर जनसुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।
जनसुनवाई को बताया दिखावा
ग्रामीणों ने प्रस्तावित जनसुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे महज खानापूर्ति बताया है। उनका कहना है कि यदि प्रभावित लोगों की पुरानी समस्याओं और शिकायतों का समाधान नहीं हुआ है, तो नई जनसुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।
भू-विस्थापितों ने प्रशासन और SECL प्रबंधन से मांग की है कि पहले पुराने प्रकरणों की समीक्षा कर लंबित मामलों का निराकरण किया जाए।
3 हजार ग्रामीणों के विरोध की चेतावनी
मामले को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यदि जनसुनवाई को रद्द नहीं किया गया और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो करीब 3 हजार ग्रामीण विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे।
ग्रामीणों का दावा है कि यह केवल कुछ लोगों की समस्या नहीं है, बल्कि परियोजना से प्रभावित बड़ी आबादी के अधिकार और भविष्य से जुड़ा मामला है।
भू-विस्थापितों में बढ़ रहा आक्रोश
भू-विस्थापितों का कहना है कि जमीन जाने के बाद परिवारों के सामने रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे जैसी कई चुनौतियां खड़ी होती हैं। ऐसे में पुराने वादों को पूरा किए बिना नई प्रक्रिया शुरू करने से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीणों और SECL प्रबंधन के बीच बातचीत कर सभी लंबित मुद्दों का समाधान निकाला जाए।

