CG News : रायपुर। देशभर में NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को लेकर उठे विवाद के बीच अब छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से भी परीक्षा प्रश्नपत्र के लीक होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही संबंधित प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। मामला सामने आने के बाद छात्रों में नाराजगी है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय में आयोजित परीक्षा से पहले ही कथित तौर पर प्रश्नपत्र सोशल मीडिया के जरिए छात्रों तक पहुंच गया। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र के वायरल होने से परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हालांकि, प्रश्नपत्र वास्तव में लीक हुआ था या सोशल मीडिया पर वायरल हुई सामग्री किसी अन्य स्रोत से संबंधित थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
कथित पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद छात्रों ने विरोध जताया। छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र किसी के पास पहुंचा था, तो यह गंभीर मामला है। इससे मेहनत कर परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो सकता है। छात्रों ने जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
परीक्षा की पारदर्शिता पर उठे सवाल
किसी भी परीक्षा में प्रश्नपत्र की गोपनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है। परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के आरोप ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल दोषियों की पहचान ही नहीं, बल्कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया की भी समीक्षा होनी चाहिए।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मामले की विस्तृत जांच को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। वायरल प्रश्नपत्र की वास्तविकता, उसके स्रोत और परीक्षा से पहले उसके प्रसार की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
यदि जांच में पेपर लीक की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

