नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 27 मार्च 2026 को देश के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्ध के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना है।
बैठक का एजेंडा: तेल, गैस और सुरक्षा
सूत्रों के अनुसार, शाम 6:30 बजे होने वाली इस बैठक में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा होगी:
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ईंधन संकट: ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद किए जाने के बाद भारत में रसोई गैस (LPG) और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। राज्यों को ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
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महंगाई पर लगाम: युद्ध के कारण बढ़ती माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स लागत का असर आम जनता पर न पड़े, इसके लिए केंद्र और राज्य ‘टीम इंडिया’ की भावना से काम करेंगे।
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भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और अब तक वापस लाए गए 3.75 लाख से अधिक लोगों के पुनर्वास पर भी बात होगी।
‘कोरोना जैसी परीक्षा का समय’
इससे पहले संसद के बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री ने देश को आगाह करते हुए कहा था कि यह युद्ध केवल दो देशों के बीच नहीं है, बल्कि इसके वैश्विक परिणाम कोरोना महामारी जैसे चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस तरह देश ने एकजुट होकर महामारी को हराया था, उसी तरह इस आर्थिक और सामरिक संकट से भी सामूहिक प्रयासों के जरिए ही निपटा जा सकता है।
चुनावी राज्यों को छूट
आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होने के कारण पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। इन राज्यों की ओर से मुख्य सचिव (Chief Secretaries) बैठक में शामिल होंगे ताकि नीतिगत निरंतरता बनी रहे।
सुरक्षा एजेंसियां ‘हाई अलर्ट’ पर
प्रधानमंत्री ने देश की तटीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक ठिकानों (जैसे रिफाइनरी और पावर प्लांट) की सुरक्षा को लेकर राज्यों को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि कुछ असामाजिक तत्व इस संकट का फायदा उठाकर भ्रम और भय फैला सकते हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

