रायपुर। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर देशभर में अपनी विशेष पहचान बनाई है। राज्य के दो जिला अस्पताल—पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार—की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तरीय गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे और तकनीकी क्षमताओं में तेजी से हो रहे विकास को दर्शाती है।
सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि पंडरी रायपुर की IPHL देश की पहली प्रमाणित लैब बनी है, जबकि बलौदाबाजार की IPHL देश और राज्य की दूसरी प्रमाणित लैब है। इस प्रकार, छत्तीसगढ़ ने IPHL नेटवर्क के मानकीकरण और गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रमाणन से प्रदेश की लैब प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और वैज्ञानिक मानकों के पालन को नई गति मिलेगी। दोनों लैब्स की सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं, जिसमें सैंपल टेस्टिंग, रिपोर्टिंग सिस्टम, स्टाफ प्रशिक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि इससे न केवल जिला स्तर पर बेहतर और सटीक जांच सेवाएं उपलब्ध होंगी, बल्कि संक्रामक रोगों की निगरानी, स्वास्थ्य सर्वेक्षण और त्वरित परीक्षण क्षमता में भी बड़ा सुधार होगा। इन लैब्स में आधुनिक उपकरणों का उपयोग और प्रशिक्षित तकनीशियनों की मौजूदगी इसे उच्च स्तर की सुविधा बनाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, IPHL मॉडल का सुदृढ़ होना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे बीमारी के शुरुआती निदान में तेजी आएगी, साथ ही स्वास्थ्य प्रणाली की प्रतिक्रिया भी अधिक प्रभावी होगी।
राज्य सरकार ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं के विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है। विभाग का कहना है कि आने वाले समय में अन्य जिलों की लैब्स को भी NQAS मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा, ताकि पूरे प्रदेश में एक जैसी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।

