कोरबा। मानिकपुर खदान विस्तार परियोजना को लेकर कोरबा जिले में एक बार फिर स्थानीय ग्रामीणों की चिंताएं सामने आई हैं। सोमवार को भिलाई खुर्द क्रमांक-1, 2 एवं 3, बरबसपुर, कर्रानाला, कदमहाखार, इमलीडुग्गू, रापाखर्रा, मानिकपुर, दादर खुर्द, ढेलवाडीह और कुदरी बस्ती सहित आसपास के कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याओं और मांगों से अवगत कराया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रस्तावित खदान विस्तार परियोजना से होने वाले संभावित प्रभावों पर चिंता व्यक्त की।
ग्रामीणों ने रखीं अपनी प्रमुख मांगें
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका, पर्यावरण, जल स्रोत, खेती और पुनर्वास जैसे मुद्दों का समाधान पहले किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक जनसुनवाई आयोजित करना उचित नहीं होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित कंपनी से उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
जयसिंह अग्रवाल ने दिया समर्थन
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने ग्रामीणों की बात सुनने के बाद कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के अधिकारों और हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान किए बिना जनसुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, तो यह न्यायसंगत नहीं होगा। उन्होंने प्रशासन से ग्रामीणों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
पुनर्वास और मुआवजे पर उठे सवाल
बैठक में ग्रामीणों ने पुनर्वास, उचित मुआवजा, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उनका कहना था कि किसी भी परियोजना से पहले प्रभावित परिवारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि सभी पक्षों से चर्चा कर पारदर्शी तरीके से निर्णय लिया जाए।
प्रशासन से संवाद की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से सीधा संवाद स्थापित करने की मांग की, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान समय रहते किया जा सके। उनका कहना है कि यदि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।

