रिफाइनरियों के लिए बदले नियम: अब नहीं बनेगी औद्योगिक गैस
नए सरकारी आदेश के मुताबिक, अब देश की सभी रिफाइनरियां और पेट्रोकेमिकल प्लांट गैसों का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स या अन्य औद्योगिक कार्यों के लिए नहीं कर सकेंगे। सरकार ने निर्देश दिया है कि रिफाइनरी से निकलने वाली अतिरिक्त गैस को सीधे एलपीजी पूल में भेजा जाए। इससे घरेलू सिलेंडरों के उत्पादन में तेजी आएगी। औद्योगिक इकाइयों को दी जाने वाली प्राथमिकता को पूरी तरह खत्म कर अब आम जनता की रसोई को पहले स्थान पर रखा गया है।
क्या है ECA और सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) लागू होने के बाद अब सरकार एलपीजी के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को पूरी तरह नियंत्रित कर सकती है। यह फैसला मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव और आयात में आ रही बाधाओं के बीच लिया गया है। कालाबाजारी और जमाखोरी (Hoarding) करने वालों के खिलाफ अब सीधे जेल और भारी जुर्माने की कार्रवाई होगी। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे गैस एजेंसियों के गोदामों की औचक जांच करें।
“घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। रिफाइनरियों को औद्योगिक इस्तेमाल रोकने के आदेश दिए जा चुके हैं। हमारा लक्ष्य अगले 15 दिनों में बैकलाग को पूरी तरह खत्म करना है। ECA लागू होने से अब सप्लाई चेन पर हमारा पूर्ण नियंत्रण है।”
— संयुक्त सचिव, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
इस फैसले से उन इलाकों में बड़ी राहत मिलेगी जहां सिलेंडर की डिलीवरी के लिए 10 से 15 दिनों का इंतजार करना पड़ रहा था। औद्योगिक सप्लाई कटने से घरेलू गैस का स्टॉक बढ़ेगा। स्थानीय गैस एजेंसियों को अब हर दिन के स्टॉक की रिपोर्ट जिला कलेक्टर कार्यालय और खाद्य विभाग को देनी होगी। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक बुकिंग न करें और पैनिक बाइंग से बचें।

