Jhiram Ghati Case : जगदलपुर। झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर कानूनी लड़ाई शुरू होने की तैयारी है। सर्व आदिवासी समाज ने मामले में कथित व्यापक साजिश समेत घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की दोबारा जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है। समाज की बैठक में इस दिशा में आगे की कानूनी प्रक्रिया और आर्थिक सहयोग जुटाने को लेकर भी चर्चा की गई।
हाईकोर्ट में अपील की तैयारी
सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि झीरम घाटी हमले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच जरूरी है। समाज की ओर से मामले में दोबारा जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा कर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
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समाज की बैठक में पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि झीरम घटना से जुड़े सवालों को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उठाया जाएगा। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज और अन्य कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है।
प्रत्येक आदिवासी परिवार से 20 रुपये सहयोग
कानूनी लड़ाई के लिए होने वाले खर्च को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। सर्व आदिवासी समाज ने बस्तर संभाग के प्रत्येक आदिवासी परिवार से 20-20 रुपये सहयोग राशि जुटाने का फैसला किया है। समाज के अनुसार इस राशि का उपयोग मामले से जुड़ी कानूनी कार्रवाई में किया जाएगा।
सहयोग राशि जुटाने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर समाज के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों के माध्यम से समन्वय किया जाएगा। इसका उद्देश्य लंबी चलने वाली कानूनी प्रक्रिया के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।
5 सितंबर को 10 आरोपी दोषी करार
झीरम घाटी हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत, जगदलपुर ने 5 सितंबर 2026 को मुकदमे का सामना कर रहे 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
अदालत के फैसले के बाद अब मामले को लेकर आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित है। दोषियों को सुनाई गई सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की प्रक्रिया भी कानूनी व्यवस्था के तहत आगे बढ़ सकती है।
झीरम घटना की दोबारा जांच की मांग
सर्व आदिवासी समाज का मुख्य जोर घटना से जुड़े कथित व्यापक षड्यंत्र और उन पहलुओं की जांच पर है, जिन्हें समाज के अनुसार अभी और जांचे जाने की आवश्यकता है। समाज ने कहा है कि वह इस मुद्दे को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाएगा।

