कुसमुंडा – सोमवार को दीपोत्सव के साथ साथ देवी महाकाली की पूजा अर्चना भी की जाती है।काली पूजा अमावस्या लगने के उपरांत ही की जाती है जो मध्य रात्रि तक चलती है।आज 3:48 बजे से अमावस्या लग जाएगी जिसके चलते पूजा शाम 7:30 बजे से प्रारंभ की जाएगी। यह आयोजन अपराजिता सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के द्वारा आयोजित किया जाता हैं।क्या आप जानते हैं महाकाली पूजा से गुप्त शत्रुओं से रक्षा, संकटों का नाश, और ग्रह दोषों (जैसे शनि, पितृ और कालसर्प दोष) से मुक्ति मिलती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वह शुम्भ-निशुम्भ जैसे दैत्यों का वध करने के लिए देवी दुर्गा के रौद्र रूप के रूप में उत्पन्न हुई थीं, जो दर्शाता है कि वह बुराई का नाश करती हैं।
महाकाली पूजा के लाभ:
शत्रु और संकट से बचाव: गुप्त शत्रुओं से रक्षा होती है और सभी प्रकार के संकटों का नाश होता है।
ग्रह दोषों से मुक्ति: सरसों के तेल और काले तिल से पूजा करने पर शनि, पितृ और कालसर्प दोषों से मुक्ति मिल सकती है।

