Digital Arrest’ बिलासपुर | 30 अप्रैल, 2026 न्यायधानी बिलासपुर में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। इस बार ठगों ने शहर की एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को अपना निशाना बनाया और उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” के जाल में फंसाकर 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए की ऑनलाइन ठगी कर ली। आरोपियों ने महिला को टेरर फंडिंग जैसे गंभीर मामले में फंसने का डर दिखाकर मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उन्होंने दबाव में आकर अपनी सारी जमापूंजी ट्रांसफर कर दी।
ठगी का तरीका: ‘स्काइप’ कॉल और फर्जी वर्दी का जाल
जानकारी के अनुसार, ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए महिला को कॉल किया। उन्होंने दावा किया कि महिला के आधार कार्ड और बैंक खाते का इस्तेमाल टेरर फंडिंग (आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराना) और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया है।
Major Action By Security Forces : इनामी नक्सली मिसिर बेसरा चारों ओर से घिरा, ऑपरेशन तेज
-
नकली माहौल: ठगों ने वीडियो कॉल (Digital Arrest) के दौरान पुलिस स्टेशन जैसा बैकग्राउंड तैयार किया था और पुलिस की वर्दी पहनकर महिला को धमकाया।
-
मानसिक दबाव: महिला को घंटों तक कैमरे के सामने रहने और किसी से भी बात न करने की हिदायत दी गई। उन्हें बताया गया कि वे “डिजिटल अरेस्ट” में हैं और बाहर जाने या फोन करने पर उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।
कैसे पार हुई 1 करोड़ की रकम?
ठगों ने महिला को यकीन दिलाया कि उनके खाते की जांच करनी होगी और इसके लिए उन्हें अपनी पूरी रकम सरकारी “सुरक्षित खाते” में ट्रांसफर करनी होगी। जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस करने का झूठा वादा किया गया। डर के मारे प्रोफेसर ने अलग-अलग किश्तों में कुल 1,04,80,000 रुपए ठगों द्वारा बताए गए खातों में जमा कर दिए।
रेंज साइबर थाना पुलिस ने शुरू की जांच
जब कई घंटों बाद भी पैसे वापस नहीं आए और ठगों के फोन बंद हो गए, तब पीड़िता को ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत मामले की शिकायत दर्ज कराई।
-
अपराध दर्ज: रेंज साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

