ई-रक्तकोष: अब डिजिटल होगा खून का एक-एक कतरा
नए नियमों के तहत, ब्लड बैंकों को अब अपनी ‘इन्वेंट्री’ छिपानी भारी पड़ेगी। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन का मतलब है कि उन्हें हर दिन के स्टॉक की जानकारी अपडेट करनी होगी। सरकार का यह ‘सेंट्रलाइज्ड सिस्टम’ मरीजों के परिजनों के लिए लाइफलाइन साबित होगा, जिन्हें अक्सर एक यूनिट खून के लिए शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक दौड़ना पड़ता है।
- रीयल-टाइम डेटा: मरीज के परिजन पोर्टल के जरिए पास के ब्लड बैंक में स्टॉक चेक कर सकेंगे।
- लाइसेंस पर खतरा: जो ब्लड बैंक पोर्टल पर डेटा अपडेट नहीं करेंगे या गड़बड़ी करेंगे, उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
- कालाबाजारी पर रोक: स्टॉक की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग से खून की अवैध बिक्री और कृत्रिम किल्लत पैदा करने वालों पर लगाम लगेगी।
CDSCO ने साफ कर दिया है कि यह नियम केवल सरकारी नहीं, बल्कि सभी निजी ब्लड बैंकों पर भी समान रूप से लागू होगा। डिजिटल निगरानी के इस नए जाल से अब किसी भी सेंटर के लिए अपनी मनमानी करना नामुमकिन होगा।
“ब्लड सेंटर्स के लिए ई-रक्तकोष पर रजिस्ट्रेशन अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है। हमारा उद्देश्य एक ऐसा नेटवर्क बनाना है जहां जरूरत पड़ने पर खून की उपलब्धता महज एक क्लिक की दूरी पर हो। डेटा में विसंगति पाए जाने पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।”
— सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) प्रवक्ता

