रायपुर (बैजनाथपारा): राजधानी रायपुर के बैजनाथपारा स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन यतीमखाना के शहर काजी आरिफ अली फारूकी को उनके पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। काजी पर पद की गरिमा के विरुद्ध आचरण करने और महिलाओं के साथ फोन पर अश्लील बातचीत करने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित महिलाओं ने काजी की काली करतूतों के सबूत समाज के सामने रखे।
क्या हैं आरोप? (ऑडियो क्लिप ने खोला राज)
शहर काजी आरिफ अली फारूकी पर आरोप है कि वे मुस्लिम समाज की महिलाओं को देर रात फोन करते थे। सामने आए साक्ष्यों के अनुसार:
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अश्लील बातचीत: काजी महिलाओं को फोन कर अभद्र और अश्लील बातें करते थे।
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तलाक और हलाला का डर: आरोप है कि वे महिलाओं को उनके पतियों से ‘तलाक’ दिलवाने और फिर ‘हलाला’ की प्रक्रिया में खुद को शामिल करने जैसी अनैतिक बातें कहते थे।
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फ्रेंडशिप का दबाव: महिलाओं को फोन पर दोस्ती (Friendship) करने के लिए मजबूर किया जाता था और इनकार करने पर धार्मिक व सामाजिक परिणामों की धमकी दी जाती थी।
प्रबंधन समिति की कड़ी कार्रवाई
मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन यतीमखाना की प्रबंध समिति ने इन शिकायतों और वायरल ऑडियो क्लिप्स का संज्ञान लेते हुए एक आपातकालीन बैठक बुलाई।
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बर्खास्तगी: आरोपों की प्रारंभिक पुष्टि के बाद समिति ने सर्वसम्मति से आरिफ अली फारूकी को शहर काजी के पद से हटा दिया है।
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प्रवेश पर रोक: उन्हें संस्था और मदरसे की गतिविधियों से भी पूरी तरह अलग कर दिया गया है।
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नोटिस जारी: समिति ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक पदों पर बैठे व्यक्ति का ऐसा आचरण असहनीय है।
समाज में भारी आक्रोश
बैजनाथपारा और आसपास के इलाकों में इस घटना के बाद से मुस्लिम समाज में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक धार्मिक गुरु से इस तरह की नीचता की उम्मीद नहीं थी। सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि केवल बर्खास्तगी काफी नहीं है, बल्कि आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और पुलिस केस दर्ज होना चाहिए।
“हमें कई महिलाओं से शिकायतें मिली थीं। जब सबूतों (कॉल रिकॉर्डिंग) की जांच की गई, तो आरोप सही पाए गए। समाज और धर्म की गरिमा को बचाने के लिए हमने उन्हें तुरंत बर्खास्त करने का निर्णय लिया है।” — प्रबंधन समिति सदस्य,

