Chhattisgarh Legislative Assembly LIVE : रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल के साथ शुरू हुई। दिन की शुरुआत से ही सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय नजर आए। जहां विपक्ष ने सरकार को कई मामलों पर घेरने की रणनीति अपनाई, वहीं सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े सवाल उठाकर मंत्रियों से जवाब मांगा।
प्रश्नकाल के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल, रामविचार नेताम और ओपी चौधरी ने विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दिया। इस दौरान शिक्षा, ग्रामीण विकास, उद्योग, कृषि, सड़क, बिजली और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
सत्ता पक्ष के विधायक भी दिखे मुखर
सत्र के चौथे दिन एक दिलचस्प स्थिति तब देखने को मिली, जब केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के विधायक भी अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर सरकार से जवाब मांगते नजर आए। कई विधायकों ने विकास कार्यों में देरी, योजनाओं के क्रियान्वयन और विभागीय कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए।
इससे सदन में कई बार गंभीर चर्चा का माहौल बना और संबंधित मंत्रियों को विस्तृत जवाब देना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का सकारात्मक संकेत है, जहां जनप्रतिनिधि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र के मुद्दे उठा रहे हैं।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक पर रहेगी नजर
आज की कार्यवाही में ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक’ सबसे महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल है। सरकार का उद्देश्य इस विधेयक के माध्यम से प्रदेश में उद्योगों की स्थापना, निवेश प्रक्रिया और विभिन्न सरकारी अनुमतियों को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
सरकार का दावा है कि इससे निवेशकों को बेहतर कारोबारी माहौल मिलेगा, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। वहीं विपक्ष इस विधेयक के कुछ प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकता है।
जनहित के कई मुद्दों पर हुई चर्चा
प्रश्नकाल के दौरान किसानों की समस्याएं, सिंचाई व्यवस्था, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, पेयजल, वनाधिकार और स्थानीय विकास कार्यों से जुड़े प्रश्न भी सदन में उठाए गए। संबंधित मंत्रियों ने विभागवार जानकारी देते हुए योजनाओं की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना सदन के सामने रखी।
विधायकों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान शीघ्र कराने की मांग भी सरकार के सामने रखी।

