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कुरियर से चलता था पूरा खेल
कहानी सीधी नहीं है। आरोपी दिल्ली से गांजा मंगाता था। तरीका—कुरियर। पैकेट आते। कोई शक नहीं करता। फिर शहर में सप्लाई। छोटा नेटवर्क नहीं, फैला हुआ जाल। पुलिस ने जब घेरा, तो आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ मिला। शुरुआती जांच में साफ हुआ—यह इंटरस्टेट सप्लाई चेन का हिस्सा है।
कटोरा तालाब बना ऑपरेशन का केंद्र
कार्रवाई सिविल लाइन थाना क्षेत्र में हुई। कटोरा तालाब के आसपास अचानक हलचल बढ़ी। पुलिस टीम पहुंची। घेराबंदी हुई। कुछ मिनट की कार्रवाई—और नेटवर्क का एक सिरा हाथ लग गया। एक अधिकारी ने बताया, “हम कई दिनों से इनपुट पर काम कर रहे थे। जैसे ही कन्फर्म हुआ, तुरंत एक्शन लिया गया।”
“यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है। इसके पीछे पूरा नेटवर्क है। हम हर लिंक तक पहुंचेंगे।” — पुलिस अधिकारी, सिविल लाइन थाना
ड्रग नेटवर्क की परतें खुलेंगी?
अब असली खेल शुरू होता है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। कौन सप्लायर? कौन रिसीवर? पैसा कैसे घूमता था? हर सवाल का जवाब अभी बाकी है। अगर कुरियर चैनल साबित होता है, तो मामला और बड़ा हो सकता है। आईटी एक्ट, NDPS एक्ट—दोनों लागू हो सकते हैं। कटोरा तालाब के आसपास आम दिन जैसा ही था। लोग टहल रहे थे। चाय की दुकानों पर बातें चल रही थीं। लेकिन अंदर ही अंदर, एक अलग ही दुनिया सक्रिय थी। यह केस वही परत खोलता है जिसे लोग देख नहीं पाते।

