रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में सक्रिय रेत माफियाओं के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए नियमों में कड़े संशोधनों को मंजूरी दी गई। नई नीति के तहत अब खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर ₹25,000 से लेकर ₹5 लाख तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार ने इसके लिए ‘छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम 2025’ और ‘गौण खनिज नियम 2015’ में अहम बदलाव किए हैं, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की चोरी को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
सरकारी संस्थाओं के लिए आरक्षित होंगी खदानें
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि राज्य में निर्माण कार्यों की गति बनाए रखने के लिए अब सरकारी संस्थाओं के लिए भी रेत खदानें आरक्षित की जा सकेंगी। इससे न केवल सरकारी परियोजनाओं के लिए रेत की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि निजी ठेकेदारों के एकाधिकार और मनमानी कीमतों पर भी लगाम लगेगी।
दंड और जुर्माने के नए प्रावधान
सरकार ने अवैध रेत उत्खनन और इसके कारोबार को आर्थिक रूप से नुकसानदेह बनाने के लिए दंड की राशि में भारी बढ़ोतरी की है।
न्यूनतम जुर्माना: अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर कम से कम ₹25,000 का दंड।
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अधिकतम जुर्माना: गंभीर मामलों और बार-बार उल्लंघन करने पर ₹5 लाख तक का जुर्माना।
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कड़ी निगरानी: अवैध परिवहन और भंडारण करने वाले वाहनों व डिपो को जब्त करने की प्रक्रिया को और सख्त बनाया गया है।
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नियम संशोधन: छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 में संशोधन कर कानूनी छिद्रों को बंद किया गया है।
पारदर्शिता और राजस्व पर जोर
इन बदलावों का एक प्रमुख उद्देश्य विभागीय पारदर्शिता बढ़ाना और राज्य के राजस्व की हानि को रोकना है। सरकार का मानना है कि कड़े आर्थिक दंड से अवैध रेत उत्खनन में शामिल सिंडिकेट हतोत्साहित होंगे। साथ ही, रेत खदानों के आवंटन और संचालन की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित किया जा रहा है ताकि आम जनता को वाजिब दाम पर रेत उपलब्ध हो सके।
अंधाधुंध और अवैध खुदाई से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को हो रहे नुकसान को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। नए नियमों के तहत स्वीकृत पट्टों की सीमाओं का उल्लंघन करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

