CG NEWS : राजनांदगांव।’ छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। सिहोर वाले प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिवपुराण कथा आयोजित कराने के नाम पर एक व्यक्ति ने ‘भोलेनाथ सेवा समिति’ को 21 लाख रुपये का चूना लगा दिया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
अंबागढ़ चौकी की भोलेनाथ सेवा समिति क्षेत्र में पंडित प्रदीप मिश्रा की भव्य शिवपुराण कथा आयोजित कराना चाहती थी। इसके लिए समिति के सदस्य लंबे समय से प्रयास कर रहे थे। इसी बीच उनकी मुलाकात छुरिया ब्लॉक के ग्राम हालेकोसा निवासी दिनेश साहू से हुई।
Major Police Action : उड़ीसा से महाराष्ट्र तस्करी का खुलासा, NH-53 पर 1.14 करोड़ का गांजा जब्त
ठगी की कहानी:
-
भरोसा जीता: आरोपी दिनेश साहू ने खुद को पंडित प्रदीप मिश्रा की टीम का करीबी बताया और दावा किया कि वह कथा की तारीख (डेट) फिक्स करा सकता है।
-
रकम की मांग: कथा के आयोजन और दक्षिणा के नाम पर आरोपी ने समिति से किस्तों में कुल 21 लाख रुपये ले लिए।
-
फर्जीवाड़ा: पैसे लेने के बाद भी जब कथा की तारीख तय नहीं हुई और आरोपी टालमटोल करने लगा, तो समिति को शक हुआ। जांच करने पर पता चला कि पंडित प्रदीप मिश्रा के कार्यालय को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।
SP से शिकायत के बाद एक्शन
धोखाधड़ी का एहसास होने पर भोलेनाथ सेवा समिति के सदस्यों ने राजनांदगांव पुलिस अधीक्षक (SP) के नाम एक ज्ञापन सौंपा और अपनी आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
-
FIR दर्ज: आरोपी दिनेश साहू के खिलाफ अंबागढ़ चौकी पुलिस ने धोखाधड़ी (धारा 420) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
-
आरोपी की तलाश: पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
भक्तों और समितियों के लिए चेतावनी
पंडित प्रदीप मिश्रा की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ठग सक्रिय हो गए हैं। हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ कथा के नाम पर लाखों की ठगी की गई है।
आयोजकों में भारी आक्रोश
21 लाख रुपये की बड़ी रकम गंवाने के बाद भोलेनाथ सेवा समिति के सदस्यों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि आरोपी से पूरी राशि वसूली जाए और उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में आस्था के नाम पर कोई इस तरह की हिम्मत न कर सके।

