CG High Court : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल में 14वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इस मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
याचिका में मंत्रिमंडल के आकार और संवैधानिक प्रावधानों से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। हाईकोर्ट अब राज्य सरकार के जवाब के बाद मामले के विभिन्न कानूनी पहलुओं पर आगे विचार करेगा।
14वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर उठे सवाल
साय मंत्रिमंडल में एक और मंत्री को शामिल किए जाने की संभावना और मंत्रिपरिषद के आकार को लेकर कानूनी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से मामले को हाईकोर्ट के समक्ष रखा गया है।
मामले में मुख्य रूप से यह सवाल है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के अनुपात में मंत्रिपरिषद का आकार कितना हो सकता है और क्या प्रस्तावित नियुक्ति संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होगी।
इसी मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
हाईकोर्ट ने सरकार को दिया चार सप्ताह का समय
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
सरकार की ओर से जवाब आने के बाद याचिकाकर्ता और अन्य पक्षों की दलीलों पर आगे सुनवाई की जाएगी। अदालत संवैधानिक प्रावधानों और मामले से जुड़े कानूनी तथ्यों के आधार पर आगे निर्णय करेगी।
मंत्रिपरिषद के आकार पर संवैधानिक प्रावधान
भारत के संविधान में राज्यों की मंत्रिपरिषद के आकार को लेकर प्रावधान निर्धारित हैं। किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के एक निश्चित प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
छत्तीसगढ़ में 14वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर भी इसी संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या और नियुक्ति की वैधानिकता को लेकर न्यायालय से स्पष्टता की मांग की गई है।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल और राजनीतिक जानकार इस मामले पर अपनी नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि सरकार की ओर से हाईकोर्ट में विस्तृत जवाब दाखिल होने के बाद ही उसका आधिकारिक पक्ष पूरी तरह स्पष्ट होगा। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई की दिशा तय होगी।

