अधिक कृष्ण जन्माष्टमी और कालाष्टमी आज— सनातन धर्म में तीन साल में एक बार आने वाले अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, आज यानी 08 जून 2026 को अधिक मास की कृष्ण जन्माष्टमी और अधिक कालाष्टमी का बेहद दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। इस विशेष तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण और काल भैरव देव की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन की गई साधना और दान-पुण्य से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हालांकि, शास्त्रों में इस दिन कुछ विशेष कड़े नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। आज के दिन की गई 4 बड़ी गलतियां आपकी पूजा को खंडित कर सकती हैं और जीवन में गंभीर संकट ला सकती हैं।
महासंयोग का महत्व: एक ही दिन श्रीकृष्ण और काल भैरव की पूजा
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाली जन्माष्टमी और कालाष्टमी का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है। आज के दिन सुबह से ही देश के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। इस तिथि पर एक ओर जहां भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है, वहीं दूसरी ओर तंत्र-मंत्र और बाधाओं से मुक्ति के लिए भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की आराधना का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से कुंडली के कई दोष शांत होते हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
CG NEWS : ग्रामीणों की गलतफहमी बनी हादसे की वजह, छत्तीसगढ़ पुलिसकर्मियों की जमकर पिटाई
भूलकर भी न करें ये 4 काम, बढ़ सकती हैं मुश्किलें
शास्त्रों और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, आज के महासंयोग पर साधकों को अपनी दिनचर्या में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। इन चार कामों को करने से पूजा का फल पूरी तरह नष्ट हो जाता है:
- तामसिक भोजन और मदिरा का सेवन: आज कालाष्टमी और जन्माष्टमी का संयोग होने के कारण पूर्ण सात्विकता बनाए रखना अनिवार्य है। आज के दिन भूलकर भी मांस, मदिरा, प्याज या लहसुन का सेवन न करें। ऐसा करने से काल भैरव का प्रकोप झेलना पड़ सकता है।
- बुजुर्गों और लाचारों का अपमान: अधिक मास परोपकार का महीना है। आज के दिन घर आए किसी याचक को खाली हाथ न लौटाएं। किसी भी बुजुर्ग, महिला या लाचार व्यक्ति का अपमान करने से संचित पुण्य समाप्त हो जाते हैं और दरिद्रता का वास होता है।
- तुलसी दल तोड़ना: भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी का पत्ता अनिवार्य माना जाता है, लेकिन आज के दिन तुलसी के पौधे को नुकसान पहुंचाना या बिना स्नान किए छूना पूरी तरह वर्जित है। पूजा के लिए तुलसी पत्र एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेने चाहिए थे।
- वाद-विवाद और क्रोध करना: आज के दिन घर में क्लेश या किसी पर भी क्रोध करने से मानसिक अशांति बढ़ती है। काल भैरव की पूजा में मन की पवित्रता जरूरी है। आज विवाद करने से भाग्य का साथ मिलना बंद हो जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए निर्देश: शाम की पूजा का सही समय
आज शाम को काल भैरव की पूजा के लिए विशेष योग बन रहा है। यदि आप आज व्रत रख रहे हैं, तो शाम के समय भैरव चालीसा का पाठ अवश्य करें। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन ने प्रमुख कृष्ण मंदिरों और अवधूत पीठों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुरक्षा घेरे के विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिरों के आसपास यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है ताकि दर्शनार्थियों को कोई असुविधा न हो।

