- बड़ा मुद्दा: रायपुर एम्स में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं।
- डिमांड: सांसद फूलोदेवी नेताम ने शून्यकाल में रिक्त पदों को तुरंत भरने और बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की मांग की।
- असर: स्टाफ की कमी से मरीजों को लंबे समय तक वेटिंग लिस्ट में रहना पड़ रहा है।
AIIMS Raipur Doctor Shortage , नई दिल्ली — छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान, रायपुर एम्स (AIIMS) में मैनपावर का संकट अब संसद के गलियारों तक पहुंच गया है। मंगलवार को राज्यसभा में कांग्रेस सांसद फूलोदेवी नेताम ने शून्यकाल के दौरान अस्पताल की खराब स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोला। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार से सवाल किया कि जब ‘स्पेशलिस्ट’ ही मैदान में नहीं होंगे, तो छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों से आने वाले मरीजों को समय पर इलाज कैसे मिलेगा? अस्पताल वर्तमान में भारी ‘वर्कलोड’ और कम स्टाफ की दोहरी मार झेल रहा है।
खाली पद और लंबी वेटिंग: मेडिकल सिस्टम पर बढ़ता दबाव
सांसद ने सदन को बताया कि रायपुर एम्स न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि ओडिशा और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के लिए भी लाइफलाइन है। लेकिन स्टाफ की कमी ने इस प्रीमियर संस्थान को ‘घुटनों पर’ ला दिया है। डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण ऑपरेशन और गंभीर बीमारियों के इलाज में महीनों की देरी हो रही है।
- स्टाफ स्टेटस: डॉक्टरों और अन्य श्रेणियों के कई पद स्वीकृत होने के बावजूद सालों से खाली हैं।
- बेड क्षमता: मरीजों की संख्या के अनुपात में बिस्तरों (Beds) की संख्या नाकाफी है।
- इलाज में देरी: स्टाफ की कमी से डायग्नोसिस और सर्जरी के वेटिंग पीरियड में भारी उछाल आया है।
सांसद फूलोदेवी नेताम ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार केवल बिल्डिंग बनाने से नहीं, बल्कि कुशल डॉक्टरों की तैनाती से होता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि विशेष भर्ती अभियान चलाकर रायपुर एम्स के रिक्त पदों को युद्ध स्तर पर भरा जाए।
“रायपुर एम्स की माली हालत चिंताजनक है। वहां न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही स्टाफ। गरीब मरीज दूर-दराज से इलाज की उम्मीद में आते हैं, लेकिन बेड और स्टाफ की कमी उन्हें निराश करती है। सरकार को तुरंत रिक्त पदों को भरना चाहिए और अस्पताल की क्षमता बढ़ानी चाहिए।”
— फूलोदेवी नेताम, राज्यसभा सांसद

