नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में आज राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव (हटाने का संकल्प) ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधा टकराव पैदा कर दिया है। जहाँ एक ओर विपक्ष इसे “संवैधानिक मर्यादा बचाने की लड़ाई” बता रहा है, वहीं भाजपा ने इस चुनौती को ध्वस्त करने के लिए अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने हेतु ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया है।
विपक्ष के गंभीर आरोप: ‘माइक बंद करने और पक्षपात’ का मुद्दा
कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का करीब 118 सांसदों ने समर्थन किया है। विपक्ष ने स्पीकर पर निम्नलिखित आरोप लगाए हैं:
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आवाज दबाना: विपक्ष का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया जाता और अक्सर उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं।
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निलंबन की कार्रवाई: विपक्ष का कहना है कि जनहित के मुद्दे उठाने पर विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित करना अनुचित है।
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निष्पक्षता का अभाव: प्रस्ताव में दावा किया गया है कि आसन का व्यवहार सत्तापक्ष की ओर झुका हुआ है।
सरकार की रणनीति: संख्या बल और तीखा पलटवार
भाजपा इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर रही है। सरकार ने अपनी एकजुटता दिखाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है:
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कड़ा व्हिप: भाजपा ने अपने सांसदों को 9 से 11 मार्च तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने और सरकार के पक्ष में मतदान करने का निर्देश दिया है।
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बहुमत का गणित: वर्तमान आँकड़ों के अनुसार, सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है, जिससे इस प्रस्ताव के गिरने की पूरी संभावना है।
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आसन पर कौन? नियमों के मुताबिक, जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव आता है, तो वे सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। फिलहाल चर्चा के दौरान पीठासीन अधिकारी (जैसे जगदंबिका पाल) सदन का संचालन कर रहे हैं।

