रायपुर। छत्तीसगढ़ में खनन से प्रभावित वन क्षेत्रों के पुनरुद्धार को लेकर सरकार ने वैज्ञानिक वानिकी पर विशेष जोर दिया है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि खनन गतिविधियों से प्रभावित वन भूमि का पुनरुद्धार केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों और वैज्ञानिक तकनीकों के आधार पर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से विकसित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में वन बहाली के कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए और पौधों के संरक्षण एवं उनके विकास की नियमित निगरानी की जाए।
वैज्ञानिक तरीके से होगा वन क्षेत्रों का पुनरुद्धार
वन मंत्री ने कहा कि खनन गतिविधियों के कारण प्रभावित भूमि की प्रकृति सामान्य वन भूमि से अलग होती है। ऐसे क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता, जल उपलब्धता और स्थानीय जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए पुनरुद्धार की रणनीति तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने वैज्ञानिक वानिकी के माध्यम से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पौध प्रजातियों का चयन करने और दीर्घकालिक वन विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। केवल पौधे लगाने के बजाय उनके जीवित रहने और प्राकृतिक रूप से विकसित होने पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
स्थानीय प्रजातियों को दिया जाए महत्व
मंत्री ने खनन प्रभावित वन भूमि के पुनरुद्धार में स्थानीय और देशज प्रजातियों को प्राथमिकता देने की बात कही। स्थानीय प्रजातियां क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुरूप होती हैं, जिससे उनके विकसित होने की संभावना अधिक रहती है।
इसके साथ ही वन क्षेत्रों में जैव विविधता को बहाल करने के लिए विभिन्न प्रजातियों के संतुलित मिश्रण पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई। इससे भविष्य में इन क्षेत्रों में वन्यजीवों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सकेगा।
पौधरोपण के बाद निगरानी जरूरी
वन मंत्री ने कहा कि पौधरोपण के बाद उनकी देखरेख और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनरुद्धार कार्यों की प्रगति का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाए।
पौधों के संरक्षण के साथ जल और मृदा संरक्षण के उपायों को भी पुनरुद्धार योजनाओं में शामिल करने पर जोर दिया गया। इससे खनन से प्रभावित भूमि को धीरे-धीरे अधिक प्राकृतिक स्थिति में लाने में मदद मिल सकती है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास पर जोर
छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां विभिन्न क्षेत्रों में खनन गतिविधियां संचालित होती हैं। ऐसे में विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि खनन गतिविधियों से प्रभावित वन भूमि का वैज्ञानिक तरीके से पुनरुद्धार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। वन क्षेत्रों को फिर से हरा-भरा बनाने के साथ जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा।

