CG NEWS : बिलासपुर।’ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नेहरू नगर स्थित एक कारोबारी के सूने मकान में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। प्रारंभिक चर्चाओं में जिस घटना को 5 करोड़ रुपये की चोरी बताया जा रहा था, पुलिस जांच में वह दावा पूरी तरह भ्रामक और निराधार निकला। सिविल लाइन थाना पुलिस और एसीसीयू (एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट) की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन विधि से संघर्षरत बालकों को अभिरक्षा में लिया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 1.06 लाख रुपये से अधिक नकद, सोने-चांदी के जेवर और अन्य चोरी का सामान बरामद किया है।
5 करोड़ की चोरी की चर्चा निकली गलत
घटना सामने आने के बाद शहर में यह चर्चा तेजी से फैल गई थी कि कारोबारी के घर से करीब 5 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। हालांकि पुलिस ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी रकम चोरी होने की बात तथ्यों पर आधारित नहीं है।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे 5 करोड़ रुपये की चोरी की पुष्टि हो। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें।
संयुक्त टीम ने की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइन थाना पुलिस और एसीसीयू की टीम ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने तीन विधि से संघर्षरत बालकों को अभिरक्षा में लिया। पूछताछ के बाद उनकी निशानदेही पर चोरी का सामान भी बरामद कर लिया गया।
नकदी और जेवर किए गए बरामद
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 1.06 लाख रुपये से अधिक नकद, सोने-चांदी के आभूषण तथा अन्य चोरी का सामान बरामद किया गया है। बरामद सामग्री का सत्यापन किया जा रहा है और उसे कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित पक्ष को लौटाने की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने चोरी की वारदात को अकेले अंजाम दिया या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।
किशोर न्याय कानून के तहत होगी कार्रवाई
चूंकि मामले में अभिरक्षा में लिए गए तीनों आरोपी विधि से संघर्षरत बालक हैं, इसलिए उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी। पुलिस ने मामले से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार कर आगे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में आधिकारिक पुष्टि से पहले सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। गलत सूचनाएं न केवल भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं, बल्कि जांच को भी प्रभावित कर सकती हैं।

