High Court’ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और उनमें हो रही मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पिछले एक वर्ष में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 6,967 लोगों की मौत हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
“क्या पुलिस का काम सिर्फ गाय हांकना है?”
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि, “क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशियों को हांकना है या यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करना भी है?” अदालत ने कहा कि सड़कों पर नियमों का पालन कराने, ओवरस्पीडिंग रोकने और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की जिम्मेदारी पुलिस की है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
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हादसों के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य में प्रतिदिन औसतन कई लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में जा रही है। इनमें राष्ट्रीय राजमार्गों के अलावा राज्य मार्ग और ग्रामीण सड़कें भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मौतें केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह प्रशासनिक विफलता का संकेत हैं।
NHAI और जिला प्रशासन को निर्देश
हाईकोर्ट ने NHAI, सभी जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से पूछा है कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों, ब्लैक स्पॉट की पहचान, चेतावनी संकेत, स्ट्रीट लाइट, स्पीड कंट्रोल उपाय और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से मांगी है।
सड़क सुरक्षा पर व्यापक योजना बनाने के संकेत
कोर्ट ने यह भी संकेत दिए कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो सड़क सुरक्षा को लेकर राज्यव्यापी व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। अदालत ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए प्रभावी और समयबद्ध कदम उठाएं।
मामले की अगली सुनवाई में NHAI, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क हादसों में हो रही मौतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

