नई दिल्ली। अमेरिका में पहले से धोखाधड़ी के मामलों का सामना कर रहे भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के वर्तमान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (तत्कालीन रक्षा मंत्री) का विश्वास हासिल किया। आरोप है कि रक्षा सौदों के नाम पर उन्होंने करीब 425 करोड़ रुपये के कथित फर्जी कर्ज को मंजूरी दिलवा दी।
CIA एजेंट बताकर बनाया कथित प्रभाव
रिपोर्टों के मुताबिक, गौरव श्रीवास्तव ने खुद को अमेरिकी सुरक्षा और खुफिया तंत्र से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए इंडोनेशिया के रक्षा प्रतिष्ठान में अपनी पहुंच बनाई। इसी दौरान उन्होंने रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति का दावा किया।
बताया गया है कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा कंपनियों से संपर्क और विशेष प्रभाव होने का दावा करते हुए खुद को उच्च स्तर का सुरक्षा विशेषज्ञ और सलाहकार के रूप में प्रस्तुत किया।
फाइटर जेट और सैन्य सिस्टम दिलाने का दावा
आरोप है कि कारोबारी ने इंडोनेशिया को 36 लड़ाकू विमान और आधुनिक सैन्य प्रणाली उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। इसी आधार पर रक्षा परियोजनाओं के लिए बड़ी वित्तीय व्यवस्था किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन रक्षा सौदों के नाम पर लगभग 425 करोड़ रुपये के कथित फर्जी ऋण को मंजूरी दिलाई गई। हालांकि, बाद में इन दावों और सौदों की वास्तविकता पर सवाल उठे, जिसके बाद मामला जांच के दायरे में आया।
अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों की नजर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला सामने आने के बाद विभिन्न एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, रक्षा अनुबंधों और कारोबारी के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच कर रही हैं। अमेरिका में भी गौरव श्रीवास्तव पहले से धोखाधड़ी से जुड़े मामलों का सामना कर रहे हैं।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित तौर पर प्रस्तुत किए गए दस्तावेज, दावे और वित्तीय लेन-देन कितने वास्तविक थे और क्या किसी सरकारी प्रक्रिया का दुरुपयोग हुआ।
रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद इंडोनेशिया के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रक्षा सौदों में पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा क्षेत्र से जुड़े किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में व्यापक जांच और सत्यापन बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि ऐसे सौदे राष्ट्रीय सुरक्षा और बड़े वित्तीय संसाधनों से जुड़े होते हैं।

