Facebook Weight Loss Fraud : नई दिल्ली। सोशल मीडिया के जरिए लोगों को ठगने वाले एक बड़े साइबर रैकेट का खुलासा हुआ है। गुजरात पुलिस ने ऐसे हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने फेसबुक पर वजन कम करने के आकर्षक विज्ञापन दिखाकर देशभर की महिलाओं को निशाना बनाया। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बिना एक्सरसाइज और बिना डाइटिंग के केवल 30 दिनों में वजन कम करने का दावा करता था। झांसे में आने वाले लोगों से कथित तौर पर करीब 80 करोड़ रुपये की ठगी की गई।
जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क को बेहद पेशेवर तरीके से संचालित किया जा रहा था। इसमें बड़ी संख्या में युवतियों और युवकों को अलग-अलग भूमिकाएं देकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की जाती थी।
फेसबुक विज्ञापन से शुरू होता था पूरा खेल
पुलिस के मुताबिक, गिरोह सबसे पहले फेसबुक पर आकर्षक विज्ञापन चलाता था। इन विज्ञापनों में दावा किया जाता था कि बिना जिम, बिना डाइटिंग और बिना किसी कठिन मेहनत के मात्र 30 दिनों में वजन कम किया जा सकता है।
विज्ञापन देखने के बाद जब लोग दिए गए नंबर या लिंक के माध्यम से संपर्क करते थे, तो उन्हें एक व्यवस्थित कॉल सेंटर से जोड़ा जाता था। यहीं से कथित ठगी का सिलसिला शुरू होता था।
150 लड़कियां बनीं ‘हेल्थ एक्सपर्ट’, 20 युवक बने डॉक्टर
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस रैकेट में लगभग 150 युवतियों को ‘हेल्थ एक्सपर्ट’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया था। वे लोगों से फोन पर बात कर उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेती थीं और भरोसा दिलाती थीं कि उनके पास वजन घटाने का प्रभावी समाधान है।
इसके बाद करीब 20 युवक खुद को डॉक्टर या मेडिकल विशेषज्ञ बताकर पीड़ितों से बातचीत करते थे। कथित विशेषज्ञ लोगों को विशेष दवाएं, सप्लीमेंट या वेट लॉस पैकेज खरीदने के लिए प्रेरित करते थे। इसी बहाने उनसे बड़ी रकम वसूली जाती थी।
देशभर की महिलाओं को बनाया निशाना
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने मुख्य रूप से महिलाओं को निशाना बनाया। वजन कम करने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को आसान और तेज़ परिणाम का लालच देकर कथित तौर पर महंगे पैकेज बेचे जाते थे।
कई मामलों में उत्पादों की गुणवत्ता संदिग्ध बताई गई है, जबकि कुछ पीड़ितों को भुगतान के बाद कोई प्रभावी सेवा या उत्पाद नहीं मिला। पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में करीब 80 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का पता चला है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी
गुजरात पुलिस ने इस साइबर नेटवर्क का भंडाफोड़ कर कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं। जांच एजेंसियां कॉल सेंटर, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, सोशल मीडिया विज्ञापनों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें कितने लोग शामिल थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले चमत्कारी दावों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद या उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। यदि कोई संस्था बिना वैज्ञानिक प्रमाण के असंभव परिणामों का दावा करती है या अग्रिम भुगतान का दबाव बनाती है, तो सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन ऑफर या साइबर ठगी की जानकारी तुरंत संबंधित साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को दें।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले आकर्षक विज्ञापन हमेशा भरोसेमंद नहीं होते। जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

