कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले स्थित दीपका ओपनकास्ट खदान से एक बड़े और संगठित ‘कोयला ग्रेड स्लिपेज घोटाले’ का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों के आधार पर इस मामले की शिकायत सर्वोच्च न्यायालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई को भेजी गई है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
शिकायत के अनुसार, कोल इंडिया, एसईसीएल और सीएमपीडीआईएल के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से कोयले का उच्च ग्रेड (G11) दिखाकर उपभोक्ताओं से भुगतान लिया जाता है, जबकि गंतव्य तक पहुंचने पर थर्ड पार्टी एजेंसियों के जरिए कागजों में इसकी गुणवत्ता कम दर्शाई जाती है। इसके बाद निजी कंपनियों को ‘क्रेडिट नोट’ के माध्यम से करोड़ों रुपये वापस कर दिए जाते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015-16 में जहां क्रेडिट राशि ₹2.98 करोड़ थी, वहीं 2016-17 में यह बढ़कर ₹31.94 करोड़ हो गई। 2018-19 में यह आंकड़ा ₹140 करोड़ के पार पहुंच गया, जबकि 2020-21 में ₹84 करोड़ से अधिक की राशि लौटाई गई।
मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका भी जताई गई है। आरोप है कि पहले यह समायोजन मुख्यालय स्तर पर होता था, लेकिन बाद में क्षेत्रीय स्तर से ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिससे गड़बड़ी की संभावना बढ़ी।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी नहीं देने पर केंद्रीय सूचना आयोग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता ने कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर संपत्ति कुर्क करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि इस कथित घोटाले पर जांच एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं और क्या जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को सदन में उठाते हैं।

