CG Ration Card Update : रायपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़े हितग्राहियों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नए राशन कार्ड बनवाने वाले लोगों को खाद्यान्न प्राप्त करने में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद कई हितग्राही राशन से वंचित हो रहे हैं। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों से ऐसे मामले सामने आए हैं, जिससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, नए राशन कार्ड जारी होने के बाद भी लाभार्थियों को तत्काल खाद्यान्न का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में कार्ड बनने के बाद पहले और दूसरे महीने राशन नहीं मिलता, जबकि तीसरे महीने से ही खाद्यान्न वितरण शुरू हो पाता है। इस देरी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा ई-केवाईसी को लेकर भी तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। कई हितग्राहियों का दावा है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी ई-केवाईसी पूरी करा ली है, लेकिन विभागीय सॉफ्टवेयर में अब भी “केवाईसी लंबित” या “अपूर्ण” की स्थिति दिखाई दे रही है। इसके चलते राशन दुकानों में उन्हें खाद्यान्न देने से मना कर दिया जा रहा है।
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राशन लेने पहुंचे कई लोगों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। हितग्राहियों का कहना है कि वे बार-बार राशन दुकान और संबंधित विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
राशन दुकानदारों का कहना है कि वे विभागीय सॉफ्टवेयर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही वितरण कर सकते हैं। यदि सिस्टम में ई-केवाईसी अपडेट नहीं दिखती या कार्ड सक्रिय नहीं होता, तो खाद्यान्न जारी करना संभव नहीं होता। ऐसे में लाभार्थियों और दुकानदारों के बीच भी विवाद की स्थिति बन रही है।
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में तकनीकी अपडेट और डेटा सिंक्रोनाइजेशन में समय लगने के कारण ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। विभाग इन शिकायतों की समीक्षा कर रहा है और जल्द समाधान का प्रयास किया जा रहा है ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ शिकायत निवारण प्रणाली को भी प्रभावी बनाना जरूरी है। इससे राशन कार्डधारकों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सकेगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।

