अहमदाबाद/नई दिल्ली। देश के सबसे भीषण विमान हादसों में से एक, ‘अहमदाबाद हवाई दुर्घटना’ को आज (12 जून 2026) ठीक एक साल पूरा हो गया है। 12 जून 2025 को हुए इस भयानक हादसे की पहली बरसी पर भारत के पायलट संगठन ने जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठन ने इस पूरे मामले की अदालती निगरानी में न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) कराने की मांग की है।
इसके साथ ही, विमान के ब्लैक बॉक्स (कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) को जांच के लिए विमान निर्माता देश अमेरिका भेजने पर भी पायलट संगठन ने कड़ी आपत्ति जताई है। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी ‘बोइंग’ की जवाबदेही हर हाल में तय होनी चाहिए।
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32 सेकंड का वो खौफनाक मंजर और 260 मौतें
ठीक एक साल पहले, 12 जून 2025 को दोपहर करीब 1:38 बजे एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 (बोइंग-787 ड्रीमलाइनर विमान) ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन के लिए उड़ान भरी थी। टेकऑफ के महज 32 सेकंड बाद ही विमान नियंत्रण से बाहर हो गया और एयरपोर्ट से करीब 1.7 किलोमीटर दूर स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज के बॉयज हॉस्टल परिसर की इमारतों से टकराकर क्रैश हो गया।
टक्कर इतनी भीषण थी कि विमान के ईंधन टैंकों में आग लग गई, जिसने देखते ही देखते हॉस्टल के डाइनिंग हॉल और कमरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोग (229 यात्री और 12 क्रू मेंबर) और जमीन पर मौजूद 19 मेडिकल छात्रों व स्टाफ सहित कुल 260 लोगों की अकाल मृत्यु हो गई थी। इस दिल दहला देने वाले हादसे में केवल एक यात्री ही सुरक्षित बच सका था।
अमेरिका में ब्लैक बॉक्स की जांच पर क्यों है आपत्ति?
विमानन दुर्घटनाओं की जांच करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था ‘एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो’ (AAIB) ने हादसे के कुछ समय बाद अपनी शुरुआती रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में सामने आया था कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ पोजीशन पर आ गए थे, जिससे इंजनों को ईंधन की सप्लाई बंद हो गई थी। हालांकि, यह कोई तकनीकी व सॉफ्टवेयर खराबी थी या मानवीय चूक, इस पर अभी भी रहस्य बना हुआ है।
भारत के मुख्य पायलट संगठन ने इसी बिंदु को लेकर जांच एजेंसियों को घेरा है। संगठन का कहना है कि:
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विमान निर्माता कंपनी बोइंग पर पहले से ही कई विमानों के डिजाइन और सुरक्षा मानकों को लेकर दुनिया भर में सवाल उठते रहे हैं।
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ऐसे में हादसे के सबसे अहम सबूत यानी ब्लैक बॉक्स को जांच के लिए अमेरिका (जहां बोइंग का मुख्यालय है) भेजना पूरी तरह गलत है, क्योंकि इससे जांच प्रभावित होने या तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी रहती है।
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संगठन की मांग है कि किसी भी विदेशी दबाव से मुक्त होकर देश की अदालत की देखरेख में इसकी निष्पक्ष जांच हो।
एक साल बाद भी सुलग रहे हैं सवाल, पीड़ितों में आक्रोश
हादसे के एक साल बीत जाने के बाद भी अंतिम विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ पाई है। बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में जहां यह विमान गिरा था, वहां आज भी उस काली दोपहर के निशान मौजूद हैं।
स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवारों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सरकार और एयरलाइन सिर्फ मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारियों से आगे बढ़ रही हैं। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की बेटी राधिका रूपाणी समेत कई पीड़ित परिवारों ने टाटा समूह के नेतृत्व वाली एअर इंडिया के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है। परिजनों की मांग है कि हादसे की जगह पर मारे गए निर्दोष लोगों की याद में एक स्मारक (Memorial) बनाया जाए और बोइंग जैसी वैश्विक कंपनियों की लापरवाही को पूरी तरह बेनकाब किया जाए।

