TMC कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में राजनीतिक उथल-पुथल तेज होती नजर आ रही है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इनके इस्तीफे के साथ ही पिछले चार दिनों में TMC के चार राज्यसभा सांसद पार्टी से दूरी बना चुके हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि राज्यसभा में TMC के कुल 13 सांसदों में से चार सांसदों के इस्तीफे ने पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। वहीं, राजनीतिक सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया जा रहा है कि पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसद अलग गुट बनाकर अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नेतृत्व को लेकर बढ़ी खींचतान
इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को स्पष्ट करना चाहिए कि वह उनके साथ हैं या फिर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को आगे बढ़ाना चाहती हैं।
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कल्याण बनर्जी के इस बयान को पार्टी के भीतर चल रही नेतृत्व संबंधी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पार्टी के अंदर बढ़ती गुटबाजी की ओर संकेत करता है।
विपक्ष ने साधा निशाना
TMC में जारी घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने भी हमला बोलना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था, जो अब खुलकर सामने आने लगा है। वहीं TMC नेताओं का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और कुछ नेताओं के व्यक्तिगत फैसलों से संगठन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस्तीफों का सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर आगामी चुनावी रणनीतियों और पार्टी संगठन पर पड़ सकता है। विशेष रूप से लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए TMC नेतृत्व के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन सकती है।

