- बड़ी सफलता: केंद्र सरकार की डेडलाइन के आखिरी दिन सुरक्षा बलों ने 5 इनामी नक्सलियों को मुख्यधारा में शामिल किया।
- स्टार प्लेयर: आत्मसमर्पण करने वालों में भैरमगढ़ एरिया कमेटी की प्रमुख सदस्य सोमें कड़ती शामिल है।
- ज्वाइंट ऑपरेशन: बस्तर आईजी, डीआईजी सीआरपीएफ और दंतेवाड़ा कलेक्टर की मौजूदगी में हुआ सरेंडर।
Chhattisgarh Naxal Elimination Campaign , दंतेवाड़ा — बस्तर के जंगलों में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे ‘मैच’ में आज सुरक्षा बलों ने एक निर्णायक बढ़त हासिल की। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नक्सली खात्मे की समय सीमा के अंतिम दिन, दंतेवाड़ा पुलिस और सीआरपीएफ ने 5 इनामी नक्सलियों को हथियार डालने पर मजबूर कर दिया। इन नक्सलियों ने बस्तर आईजी सुंदरराज पी. और कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के सामने अपने हथियार छोड़ दिए। यह सरेंडर उस रणनीति का हिस्सा है जिसने बस्तर के भीतरी इलाकों में नक्सलियों की ‘फील्डिंग’ को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।
मैदान पर ‘क्लीन स्वीप’: सोमें कड़ती का सरेंडर क्यों है अहम?
आज के इस सरेंडर में सबसे बड़ा नाम सोमें कड़ती का है। वह भैरमगढ़ एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य थी और उस पर लाखों का इनाम घोषित था। सुरक्षा बलों के लिए यह किसी ‘बड़ी विकेट’ को गिराने से कम नहीं है।
- एरिया कमेटी ब्रेकडाउन: सोमें के हटने से भैरमगढ़ इलाके में नक्सलियों का सूचना तंत्र कमजोर होगा।
- इनामी राशि: आत्मसमर्पण करने वाले इन 5 नक्सलियों पर कुल मिलाकर लाखों रुपये का इनाम था।
- डेडलाइन का असर: सरकार की ओर से दी गई अंतिम चेतावनी और विकास की नीतियों ने इन नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर किया।
आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सली अब सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएंगे। उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने के लिए तत्काल सहायता राशि भी प्रदान की गई है।
“ये आत्मसमर्पण बस्तर में शांति की ओर एक बड़ा कदम है। सोमें कड़ती जैसे कैडर्स का मुख्यधारा में आना यह साबित करता है कि अब नक्सली विचारधारा के प्रति लोगों का मोहभंग हो रहा है। हम अंतिम सीमा तक इस लड़ाई को जीतेंगे।”
— सुंदरराज पी., आईजी, बस्तर रेंज

