रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में राजस्व विभाग के कामकाज में कसावट लाने और आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी इन दिनों ‘एक्शन मोड’ में हैं। लगातार मिल रही शिकायतों और विभागीय समीक्षा के दौरान संतोषजनक कार्य न पाए जाने पर कलेक्टर ने लैलूंगा तहसीलदार शिवम पांडे के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। लापरवाह रवैये के चलते उन्हें पद से हटाते हुए तत्काल प्रभाव से जिला मुख्यालय में अटैच कर दिया गया है।
हिदायत के बाद भी नहीं सुधरी कार्यप्रणाली सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी पिछले काफी समय से राजस्व अधिकारियों के कामकाज की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। इस दौरान जिन अधिकारियों का प्रदर्शन कमजोर पाया गया, उन्हें कार्यशैली सुधारने की सख्त हिदायत दी गई थी। लैलूंगा तहसीलदार शिवम पांडे को भी पूर्व में कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन उनके कामकाज में कोई सुधार नहीं दिखने पर अंततः कलेक्टर ने गाज गिरा दी।
कलेक्टर की ‘थ्री-लेयर’ मॉनिटरिंग: अधिकारियों का भ्रम टूटा अक्सर नायब तहसीलदारों, तहसीलदारों और एसडीएम (SDM) को यह मुगालता रहता है कि फील्ड में किए जा रहे कार्यों का पूरा फीडबैक कलेक्टर तक नहीं पहुंचता होगा। लेकिन रायगढ़ कलेक्टर ने यह साफ कर दिया है कि उनके पास सूचनाएं प्राप्त करने के कई पुख्ता स्रोत हैं।
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वे न केवल विभागीय रिपोर्ट बल्कि ग्राउंड जीरो से आम जनता का फीडबैक भी ले रहे हैं।
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डैशबोर्ड और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लंबित प्रकरणों की नियमित निगरानी की जा रही है।
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गोपनीय तरीके से भी तहसील कार्यालयों की कार्यप्रणाली की जानकारी जुटाई जा रही है।
राजस्व विभाग में हड़कंप इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य राजस्व अधिकारियों में भी हड़कंप की स्थिति है। कलेक्टर ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि जनता के काम में देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण राजस्व मामलों में अगर अधिकारी ढिलाई बरतेंगे, तो उन पर भी इसी तरह की गाज गिर सकती है।
कलेक्टर का कड़ा संदेश: “प्रशासनिक अमले को जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा। समीक्षा बैठकों का उद्देश्य केवल आंकड़े देखना नहीं, बल्कि धरातल पर सुधार लाना है। जो अधिकारी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, उन्हें महत्वपूर्ण पदों से हटा दिया जाएगा।”

