- बड़ा टर्न: सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद छत्तीसगढ़ का सबसे चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड बिलासपुर हाईकोर्ट में फिर से खुल गया है।
- तारीख तय: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने अंतिम बहस के लिए 1 अप्रैल की डेडलाइन सेट की है।
- पक्षकार: मामले में CBI, राज्य सरकार और अमित जोगी को अपनी दलीलें पेश करने का आखिरी मौका मिलेगा।
Ramavatar Jaggi Murder Case Update , बिलासपुर — छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिला देने वाला रामावतार जग्गी हत्याकांड एक बार फिर अदालत की मुख्य पिच पर लौट आया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस केस को रिओपन कर दिया है। बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सतीश जग्गी का पक्ष सुना। अदालत के इस एक्शन ने उन आरोपियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, जिन्हें लगा था कि यह मामला ठंडे बस्ते में जा चुका है। अब सबकी नजरें 1 अप्रैल पर टिकी हैं, जब इस कानूनी मुकाबले का नतीजा करीब होगा।
अदालत की ‘फील्डिंग’ सख्त: अमित जोगी को देना होगा जवाब
यह मामला महज एक मर्डर मिस्ट्री नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सत्ता और रसूख की पुरानी जंग है। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की फाइलों को फिर से झाड़ने का आदेश देकर साफ कर दिया है कि इंसाफ की प्रक्रिया अधूरी नहीं छोड़ी जा सकती।
- बुधवार की सुनवाई: सतीश जग्गी ने अदालत के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा। कोर्ट ने दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया है।
- अगला स्पेल (1 अप्रैल): इस दिन CBI अपनी जांच के सबूत पेश करेगी, जबकि अमित जोगी को अपने बचाव में अंतिम दलीलें देनी होंगी।
- हाई-स्टेक मामला: राज्य सरकार भी इस सुनवाई में अपनी भूमिका स्पष्ट करेगी, जिससे केस की दिशा तय होगी।
राजनीतिक गलियारों में अमित जोगी के बयान की खूब चर्चा है। उन्होंने अदालत के बाहर मीडिया से बात करते हुए आत्मविश्वास दिखाया है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब डिफेंस के लिए रन बनाना आसान नहीं होगा।
“हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं। हम 1 अप्रैल को अदालत में अपना पक्ष रखेंगे और अंत में सत्य की ही जीत होगी।”
— अमित जोगी, जेसीसीजे नेता

