रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन ने संपत्ति के पंजीयन और मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के दो प्रमुख जिलों— दुर्ग और सरगुजा में अचल संपत्तियों की नई गाइडलाइन दरें (Guideline Rates) लागू होने जा रही हैं। राज्य सरकार के निर्देश पर जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा भेजे गए संशोधित प्रस्तावों को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने अपनी मंजूरी दे दी है।
यह बदलाव होली (मार्च 2026) से ठीक पहले प्रभावशील हो जाएगा, जिससे इन जिलों में जमीन, मकान और दुकानों की सरकारी कीमतें बढ़ जाएंगी।
पुनरीक्षण की क्यों पड़ी जरूरत?
राज्य शासन ने पूर्व में 20 नवंबर 2025 से नवीन गाइडलाइन दरें लागू की थीं। हालांकि, बाजार की वास्तविक स्थितियों और व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए जिला मूल्यांकन समितियों को दरों के पुनरीक्षण (Revision) के प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए थे।
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दुर्ग और सरगुजा: इन दोनों जिलों से प्राप्त प्रस्तावों में कुछ क्षेत्रों में दरों को तर्कसंगत बनाने और कुछ विकसित क्षेत्रों में कीमतें बढ़ाने का सुझाव दिया गया था।
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केंद्रीय बोर्ड की बैठक: महानिरीक्षक पंजीयन की अध्यक्षता में हुई ‘केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड’ की उच्च स्तरीय बैठक में इन प्रस्तावों का गहन परीक्षण किया गया, जिसके बाद इन्हें अंतिम स्वीकृति दी गई।
आम जनता पर क्या होगा असर?
नई गाइडलाइन दरें लागू होने से इन दोनों जिलों में संपत्ति का लेनदेन करने वाले लोगों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा:
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रजिस्ट्री शुल्क में बढ़ोतरी: चूंकि गाइडलाइन दरें बढ़ रही हैं, इसलिए संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए अब अधिक स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क चुकाना होगा।
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पारदर्शिता: शासन का दावा है कि दरों को ‘व्यावहारिक’ बनाने से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी और काले धन के प्रवाह पर लगाम लगेगी।
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राजस्व में वृद्धि: इन दो बड़े जिलों में दरों के संशोधन से राज्य सरकार के खजाने में राजस्व (Revenue) की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
होली से पहले प्रभावी करने का लक्ष्य
विभागीय सूत्रों के अनुसार, संशोधित दरों की अधिसूचना जल्द ही जारी कर दी जाएगी। सरकार का प्रयास है कि मार्च के पहले पखवाड़े में, यानी होली के त्यौहार से पहले इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाए। इससे पहले जो लोग पुरानी दरों पर रजिस्ट्री कराना चाहते हैं, उनके पास सीमित समय बचा है।

