वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब चरम पर पहुँच गया है। फरवरी 2026 में जिनेवा में हुई दूसरे दौर की वार्ता विफल होने और ईरान द्वारा अमेरिकी पाबंदियों को दरकिनार करने के बाद, क्षेत्र में युद्ध की आशंका प्रबल हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है, जिसके बाद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य हलचल तेज हो गई है।
प्रमुख सुर्खियाँ :
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युद्ध की तैयारी: क्या है मौजूदा स्थिति?
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के शीर्ष अधिकारियों के साथ ‘सिचुएशन रूम’ में बैठक की है। इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु ठिकानों और मिसाइल सेंटरों पर संभावित कार्रवाई करना था।
सैन्य लामबंदी की मुख्य बातें:
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विमानवाहक पोत की तैनाती: ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ और ‘यूएसएस जेराल्ड फोर्ड’ जैसे शक्तिशाली विमानवाहक पोत अपने बेड़े के साथ मिडिल ईस्ट के करीब तैनात हैं।
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लड़ाकू विमानों का जमावड़ा: जॉर्डन और आसपास के अमेरिकी अड्डों पर 50 से अधिक F-22 और F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स को स्टैंडबाय पर रखा गया है।
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ईरान का रुख: ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी मिसाइल और रक्षा क्षमताओं पर कोई समझौता नहीं करेगा, जिससे कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं।
‘रमजान’ और हमले की तारीख को लेकर अटकलें
विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स और रक्षा विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज है कि अमेरिका ने हमले की संभावित रूपरेखा तैयार कर ली है। कहा जा रहा है कि यदि ईरान फरवरी के अंत तक अपनी परमाणु नीतियों पर पीछे नहीं हटता, तो मार्च में (रमजान के दौरान) सैन्य कार्रवाई शुरू हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर ट्रंप प्रशासन ने अभी किसी तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन सैन्य अधिकारियों को ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार है।
रूस की चेतावनी: रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने चेतावनी दी है कि ईरान पर किसी भी नए हमले के परिणाम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए “विनाशकारी” होंगे। उन्होंने इसे “आग से खेलना” करार दिया है।

