नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की सुगबुगाहट के बीच सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर रक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मियों ने केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी मांग रख दी है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIDEF) ने महंगाई भत्ते (DA) के मौजूदा फॉर्मूले को ‘पुराना’ और ‘अपर्याप्त’ बताते हुए इसमें आमूलचूल बदलाव की वकालत की है। कर्मचारियों का तर्क है कि वर्तमान तरीका बाजार की वास्तविक महंगाई को दर्शाने में विफल है।
क्या है मौजूदा विवाद?
वर्तमान में, केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आधार पर तय होता है। रक्षा कर्मचारियों का कहना है कि इस सूचकांक में शामिल वस्तुओं का ‘वेटेज’ दशकों पुराना है। आज के समय में शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन पर होने वाला खर्च कई गुना बढ़ गया है, जिसे वर्तमान DA फॉर्मूला पूरी तरह कवर नहीं कर पाता।
AIDEF का तर्क: “मौजूदा फॉर्मूला वास्तविक महंगाई और कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) के बीच के अंतर को कम करने में असमर्थ है। हमें एक ऐसे डायनेमिक मॉडल की जरूरत है जो रीयल-टाइम मार्केट डेटा पर आधारित हो।”
सैलरी पर कैसे पड़ेगा असर?
अगर सरकार DA की गणना के लिए नए इंडेक्स या नए आधार वर्ष (Base Year) को मंजूरी देती है, तो इसका सीधा असर कर्मचारियों की कुल सैलरी पर दिखेगा:
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DA प्रतिशत में वृद्धि: नए फॉर्मूले से गणना करने पर DA का प्रतिशत वर्तमान की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ सकता है।
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बेसिक पे में मर्जर: 8वें वेतन आयोग के तहत यदि DA को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाता है और गणना का नया तरीका अपनाया जाता है, तो न्यूनतम वेतन में ₹5,000 से ₹10,000 तक की अतिरिक्त वृद्धि संभव है।
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रिटायरमेंट बेनिफिट्स: DA बढ़ने का सीधा असर ग्रेच्युटी और पेंशन पर भी पड़ता है, जिससे रिटायर्ड कर्मचारियों को भी बड़ा लाभ होगा।
8वें वेतन आयोग से उम्मीदें
आमतौर पर हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग लागू होता है। 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, लिहाजा 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होनी चाहिए। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द आयोग का गठन करे ताकि वेतन विसंगतियों और DA के नए फॉर्मूले पर चर्चा शुरू हो सके।

